Wednesday, 29 April 2020

अइय्यो

वक़्त के तिराहे पर निकले
हाँफ जाता हूँ चढ़ के चढानेें;
साल के इस दिन
कौन सी बारिश पड़ती है?
जो स्याही की शीशी
खुद ही भर जाती है !
डायरी  खोलता हूँ तो
एक नन्ही  नज़्म मेरी
कंधे पर आकर बैठ जाती है
और कहती है-
सब ठीक हो जायेगा !

Monday, 19 August 2019

Misfits

I'm not a poet, not an artist
Not a preacher
But my own disillusionment-
I'm a bluffer and a liar;
And I float amidst fast-sinking living torsos
Of dead men;
Urging them to rise;
Pinching and scratching their
shriveled up thickened skins
With bare finger-nails;
Often thrashing their half sunken heads
With words, in my own desperation-
To make them see - what I do;
Or perhaps find a bunch of misfits
Who'd swim with me
Into the horizon

Friday, 21 December 2018

पुणे - II


बार बार मुड़ कर
पीछे देखते हो
कि मीटर तो चालू  है ना !

चालू ही है
रिक्शा वाले भैय्या ...
वो पतलून हमारी ही है
जिसकी पिछली जेब का सूत उधेड़
तुम्हारा चालू मीटर लोट-लोट कर
अपनी रीडिंग बुन रहा है..

टर्रररररक-टक
टर्रररररक-टक

अरे हाँ...
बैंक के खाते में बचा-कुचा
पिछली दीवाली का bonus है
अब हाफ-रिटर्न बोल के
डाका भी डाल  दो!

Thursday, 20 December 2018

वक़्त का शहर

शहर भी उनका, पैमाइश भी उनकी
वक़्त के इस शहर में बातें कभी बीती नहीं होती

यहाँ हर गुज़रे लम्हे के अर्ज़ पर एक इमारत खड़ी है
हर ख़्वाबीदा मुस्कान के गुलज़ार खिले हैं
उन लावारिस सवालों की बड़ी-बड़ी हवेलियाँ -
खँडहर हुईं, पर भूली नहीं गयी..

यहां साला सब ही कुछ landmark सा है
रास्ता भटकने जाएँ भी तो कहाँ जाएँ !





Tuesday, 28 August 2018

दुनिया साली depressing है

टीवी पर न्यूज़ नहीं देखते अब -
रंग-बिरंगे फुदकते footage,
खोटी नीयतों के opinion
और कुत्ते-बिल्ली के चाटे गोबर के कंडे?
ये कुछ नहीं बदलते !

कल फ़ेसबुक पर एक वीडियो
सामने पड़ गया;
जो देखा
वो सीने में गड़ गया..
कठुआ का किस्सा ही ऐसा है!
क्यों देख रहे थे हम ये?
किसी को awareness फैलाना है-
के अपना पक्ष जताना है
अच्छाई को बुराई से जिताना है?

पर ऐसा होता कहाँ है..
इसीलिए साली दुनिया depressing है !

कुछ होता है कहीं
और सोशल मीडिया पर
तीन पेटिशन रिक्वेस्ट आते हैं
किसको भई ?
parliament के सफेदपोशों को -
तमाशबीन हैं साले;
क़ागज़ के पुर्जों के
popcorn बना कर गटका करते हैं
फिर आपके खून-पसीने का एक chilled सिप
...आह!
This session is adjourned.


तभी याद आता है
ये जो सुलझे से बने घूमते हैं -
रगों में हमारे भी लावा बहता है!
बोलने का मौका दीजिये
फिर  volcano भी फटता है..
हम लाख ख़याल बुन लें
जोश भरे लफ्ज़ चुन लें
पर जब तक कुछ बदलता नहीं
दुनिया साली depressing ही है !